बचपन से ही आसमान ने हम सबको अपनी ओर खींचा है, है ना? कभी सोचा है कि रात के गहरे नीले कैनवास पर टिमटिमाते तारों के पीछे आखिर क्या-क्या रहस्य छुपे हैं? मुझे आज भी याद है, कैसे मैं घंटों छत पर लेटा रहता था, बस यही जानने की कोशिश में कि वो दूर चमकते तारे हमसे क्या कहना चाहते हैं। उस वक्त तो वो सिर्फ़ कोरी कल्पना थी, पर अब हमारे वैज्ञानिक भी उन्हीं रहस्यों को सुलझाने में दिन-रात एक कर रहे हैं।आजकल तो अंतरिक्ष की दुनिया में आए दिन नई-नई खोजें हो रही हैं। हमारे देश के चंद्रयान और गगनयान जैसे मिशन हमें सिर्फ़ गर्व ही नहीं महसूस कराते, बल्कि ब्रह्मांड के कई अनजाने दरवाज़े भी खोलते हैं। क्या हम इस विशाल ब्रह्मांड में अकेले हैं?
क्या किसी और ग्रह पर भी जीवन संभव है? ऐसे सवाल अक्सर मेरे मन में कौंधते रहते हैं और मुझे पता है कि आप भी ऐसा ही सोचते होंगे। आसमान सिर्फ़ नीला रंग नहीं, बल्कि अनगिनत कहानियों और चमत्कारों का भंडार है जिसे जितना जानो, उतनी ही जिज्ञासा बढ़ती जाती है। मेरा अनुभव कहता है कि हर नई जानकारी हमें और भी गहराई में खींच लेती है। तो चलिए, आज हम आसमान के ऐसे ही कुछ अनसुने और रोमांचक रहस्यों को सटीक तरीके से जानने की कोशिश करेंगे।
ब्रह्मांड की अनंत पहेलियाँ: क्या हम अकेले हैं?

एलियन जीवन की संभावना: सदियों पुरानी जिज्ञासा
बचपन से ही, जब हम रात में तारों को देखते हैं, तो मन में एक सवाल ज़रूर आता है – क्या हम इस विशाल ब्रह्मांड में अकेले हैं? मुझे तो हमेशा से लगता रहा है कि इतनी बड़ी जगह में सिर्फ़ हम ही कैसे हो सकते हैं!
वैज्ञानिकों ने भी इस सवाल का जवाब ढूंढने में सदियां गुजार दी हैं और आज भी ये खोज जारी है। जब हम पृथ्वी से परे जीवन की बात करते हैं, तो अक्सर दिमाग में हरी-भरी छोटी आँखें और अजीबोगरीब दिखने वाले जीव आते हैं, जैसे हमने फ़िल्मों में देखा है। पर असलियत में, जीवन के रूप इससे कहीं ज़्यादा अलग हो सकते हैं। हो सकता है कि वो बैक्टीरिया जितने छोटे हों या फिर ऐसे जीव हों जिनकी कल्पना भी हमने न की हो। मेरा अनुभव कहता है कि ये सिर्फ़ कल्पना नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक संभावना है जिस पर गंभीरता से काम हो रहा है।
मंगल पर पानी और जीवन के निशान
मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना हमेशा से ही वैज्ञानिकों को आकर्षित करती रही है। मुझे याद है, जब मैंने पहली बार सुना था कि मंगल पर पानी के जमने के निशान मिले हैं, तो मुझे कितनी हैरानी हुई थी!
इसका मतलब ये है कि एक समय था जब मंगल पर तरल पानी मौजूद था, और जहाँ पानी होता है, वहाँ जीवन की संभावना भी बढ़ जाती है। नासा के पर्सिवियरेंस रोवर जैसे मिशन लगातार मंगल की सतह पर खुदाई कर रहे हैं, मिट्टी और चट्टानों के नमूने इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि प्राचीन माइक्रोबियल जीवन के कोई सबूत मिल सकें। सोचिए, अगर हमें वहां सच में ऐसे सूक्ष्मजीवों के जीवाश्म मिल जाते हैं, तो ये ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझ को पूरी तरह से बदल देगा। ये खोज सिर्फ़ विज्ञान नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व के मायने भी बदल सकती है।
ग्रहों से परे जीवन की खोज: नए क्षितिज
एक्सोप्लैनेट्स की खोज और जीवन के लिए उपयुक्त ग्रह
पिछले कुछ सालों में हमने हज़ारों एक्सोप्लैनेट्स यानी हमारे सौर मंडल के बाहर के ग्रहों की खोज की है। ये एक ऐसी दुनिया है जिसके बारे में पहले सिर्फ़ कल्पना ही की जा सकती थी!
मुझे याद है, जब केप्लर स्पेस टेलीस्कोप ने एक के बाद एक ग्रहों की खोज शुरू की थी, तो मैं हर नई ख़बर को बड़े चाव से पढ़ता था। इनमें से कुछ एक्सोप्लैनेट्स तो ऐसे हैं जो अपने तारों से ‘गोल्डीलॉक्स ज़ोन’ में हैं, यानी न ज़्यादा गर्म और न ज़्यादा ठंडे, जहाँ तरल पानी मौजूद हो सकता है। यह ज़ोन जीवन के पनपने के लिए सबसे अहम माना जाता है। ऐसे ग्रहों पर वायुमंडल और तरल पानी की मौजूदगी की संभावनाएँ हमें और भी उत्साहित करती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन ग्रहों पर जीवन के संकेत मिलने की प्रबल संभावनाएँ हैं।
बायोसिग्नेचर की पहचान और भविष्य की उम्मीदें
जीवन की खोज में एक अहम पड़ाव है ‘बायोसिग्नेचर’ की पहचान। बायोसिग्नेचर ऐसे रासायनिक निशान होते हैं जो किसी ग्रह के वायुमंडल में जीवन की उपस्थिति का संकेत देते हैं, जैसे ऑक्सीजन, मीथेन या ओज़ोन। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप जैसे शक्तिशाली उपकरण अब इन एक्सोप्लैनेट्स के वायुमंडल का विश्लेषण कर रहे हैं। सोचिए, अगर हमें किसी दूरदराज के ग्रह के वायुमंडल में ऑक्सीजन जैसी गैस मिलती है, तो यह कितना बड़ा संकेत होगा!
यह हमें बताएगा कि वहाँ कोई ऐसी जैविक प्रक्रिया चल रही है जो इन गैसों का उत्पादन कर रही है। मुझे तो लगता है कि ये सिर्फ़ समय की बात है जब हम अंतरिक्ष में अपने पड़ोसी ढूँढ लेंगे। यह वाकई ब्रह्मांड के प्रति हमारी जिज्ञासा को एक नया आयाम देता है।
सितारों का जन्म और उनकी अंतिम यात्रा
तारों का अद्भुत जन्म और विकास
क्या आपने कभी सोचा है कि ये टिमटिमाते तारे कहाँ से आते हैं? मुझे तो हमेशा से ये एक जादू सा लगता था! तारे असल में धूल और गैस के विशाल बादलों से पैदा होते हैं, जिन्हें नेबुला कहते हैं। गुरुत्वाकर्षण इन बादलों को एक साथ खींचता है, जिससे वे सिकुड़ते जाते हैं और उनका तापमान बढ़ने लगता है। यह प्रक्रिया लाखों साल तक चलती है, और अंत में जब अंदर का तापमान इतना ज़्यादा हो जाता है कि नाभिकीय संलयन शुरू हो जाए, तब एक नया तारा चमक उठता है। यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे किसी नन्हे बच्चे का जन्म होता है, और फिर वह धीरे-धीरे बड़ा होता है। हर तारे का अपना एक जीवन चक्र होता है, कुछ तारे छोटे होते हैं और लंबे समय तक जीते हैं, जबकि कुछ विशाल तारे बहुत तेज़ी से अपना जीवन पूरा करते हैं।
सुपरनोवा और ब्लैक होल का निर्माण
हर कहानी का एक अंत होता है, और तारों का भी। लेकिन तारों का अंत कोई साधारण बात नहीं होती! जब बड़े तारे अपनी हाइड्रोजन ईंधन को ख़त्म कर देते हैं, तो वे फूलने लगते हैं और फिर एक भयंकर विस्फोट के साथ फट जाते हैं, जिसे सुपरनोवा कहते हैं। यह विस्फोट इतना शक्तिशाली होता है कि यह हमारी पूरी आकाशगंगा को कुछ समय के लिए रोशन कर सकता है। मुझे आज भी याद है जब मैंने पहली बार सुपरनोवा की तस्वीर देखी थी, उसकी चमक ने मुझे अचंभित कर दिया था। सुपरनोवा के बाद, तारे का बचा हुआ कोर या तो न्यूट्रॉन तारा बन जाता है या फिर, अगर तारा बहुत विशाल था, तो वह एक ब्लैक होल में सिमट जाता है। यह प्रक्रिया ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमय पिंडों में से एक को जन्म देती है।
ब्लैक होल: ब्रह्मांड के अजूबे और उनके रहस्य
ब्लैक होल क्या हैं और वे कैसे बनते हैं?
ब्लैक होल… सिर्फ़ नाम सुनकर ही एक रोमांच और डर का एहसास होता है, है ना? ये ब्रह्मांड के वो सबसे रहस्यमय पिंड हैं जहाँ गुरुत्वाकर्षण इतना ज़्यादा होता है कि प्रकाश भी इनसे बाहर नहीं निकल सकता। सोचिए, रोशनी भी नहीं!
इन्हें अदृश्य दानव कहा जाता है। ब्लैक होल तब बनते हैं जब बहुत बड़े तारे अपने जीवन के अंत में सुपरनोवा के बाद ढह जाते हैं। उनका सारा द्रव्यमान एक बहुत छोटे से बिंदु में सिमट जाता है, जिससे गुरुत्वाकर्षण बल अविश्वसनीय रूप से बढ़ जाता है। मुझे तो लगता है कि ये प्रकृति का सबसे बड़ा आश्चर्य हैं, जो हमें दिखाते हैं कि ब्रह्मांड के नियम कितने अद्भुत और कभी-कभी डरावने हो सकते हैं। इनकी सीमा को ‘इवेंट होराइज़न’ कहते हैं, जिसके पार एक बार कुछ चला गया तो वापस कभी नहीं आता।
ब्लैक होल के प्रकार और उनका ब्रह्मांड में प्रभाव

वैज्ञानिकों ने मुख्य रूप से तीन प्रकार के ब्लैक होल पाए हैं: स्टेलर ब्लैक होल, इंटरमीडिएट ब्लैक होल और सुपरमैसिव ब्लैक होल। स्टेलर ब्लैक होल वे होते हैं जो विशाल तारों के ढहने से बनते हैं। इंटरमीडिएट ब्लैक होल के बारे में अभी भी बहुत कुछ जानना बाकी है, लेकिन सबसे दिलचस्प हैं सुपरमैसिव ब्लैक होल। ये हमारी आकाशगंगाओं के केंद्र में पाए जाते हैं और इनका द्रव्यमान लाखों-करोड़ों सूर्यों के बराबर होता है!
हमारी अपनी आकाशगंगा मिल्की वे के केंद्र में भी ‘सैजिटेरियस ए*’ नाम का एक सुपरमैसिव ब्लैक होल है। मेरा मानना है कि ये ब्लैक होल सिर्फ़ चीज़ों को निगलते ही नहीं, बल्कि आकाशगंगाओं के निर्माण और उनके विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह वाकई हैरान कर देने वाली बात है कि ये अदृश्य पिंड कैसे पूरे ब्रह्मांड को प्रभावित करते हैं।
अदृश्य शक्तियों का खेल: डार्क मैटर और डार्क एनर्जी
डार्क मैटर: ब्रह्मांड का अदृश्य गोंद
हम जो कुछ भी ब्रह्मांड में देखते हैं – तारे, ग्रह, आकाशगंगाएँ – वो पूरे ब्रह्मांड का सिर्फ़ 5% हिस्सा हैं। ये सुनकर मुझे कितना अजीब लगा था, कि ज़्यादातर चीज़ें तो हमें दिखती ही नहीं हैं!
बाकी का लगभग 27% हिस्सा ‘डार्क मैटर’ से बना है। ये एक ऐसी चीज़ है जिसे हम देख नहीं सकते, छू नहीं सकते और न ही किसी उपकरण से महसूस कर सकते हैं, क्योंकि यह प्रकाश के साथ या किसी और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक बल के साथ इंटरैक्ट नहीं करता। लेकिन इसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव बहुत ज़्यादा होता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि डार्क मैटर ही वह अदृश्य “गोंद” है जो आकाशगंगाओं को एक साथ पकड़े रखता है, नहीं तो वे अपनी तेज़ गति के कारण बिखर जातीं। मेरी राय में, यह ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य है जिसकी गुत्थी सुलझाना अभी बाकी है।
डार्क एनर्जी: ब्रह्मांड का विस्तार करने वाली शक्ति
और अब बात करते हैं ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमय हिस्से की – ‘डार्क एनर्जी’, जो पूरे ब्रह्मांड का लगभग 68% हिस्सा है! ये वो अदृश्य शक्ति है जो ब्रह्मांड के विस्तार को और भी तेज़ कर रही है। जब मैंने पहली बार ये पढ़ा था कि ब्रह्मांड सिर्फ़ फैल नहीं रहा, बल्कि तेज़ी से फैल रहा है, तो मुझे लगा कि ये कोई काल्पनिक कहानी है। लेकिन वैज्ञानिक प्रेक्षणों से ये साबित हो चुका है। डार्क एनर्जी के बारे में हमें ज़्यादा कुछ नहीं पता, बस इतना कि यह अंतरिक्ष में हर जगह मौजूद है और ब्रह्मांड को बाहर की ओर धकेल रही है। यह गुरुत्वाकर्षण के विपरीत काम करती है। यह बिल्कुल ऐसा है जैसे कोई अदृश्य हाथ ब्रह्मांड को हर दिशा में खींच रहा हो। इन दोनों अदृश्य शक्तियों को समझना ही भविष्य की खगोल विज्ञान की सबसे बड़ी चुनौती है, और मैं तो इस यात्रा का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूँ।
हमारी आकाशगंगा: मिल्की वे के अनसुने राज़
मिल्की वे का भव्य विस्तार और उसकी संरचना
हम जिस आकाशगंगा में रहते हैं, उसका नाम मिल्की वे है, यानी क्षीरमार्ग। रात के साफ़ आसमान में हमें अक्सर एक हल्की सी दूधिया पट्टी दिखाई देती है, वही हमारी आकाशगंगा का एक हिस्सा है। मुझे तो हमेशा से लगता था कि ये बस एक धुंधली सी चीज़ है, लेकिन असल में ये अरबों-खरबों तारों, धूल और गैस का एक विशाल सर्पिल आकार का संग्रह है। हमारी आकाशगंगा इतनी बड़ी है कि इसमें सूर्य जैसे सैकड़ों अरबों तारे हैं!
हमारी पृथ्वी मिल्की वे के एक बाहरी सर्पिल भुजा पर स्थित है, जिसे ओरियन आर्म कहते हैं। मिल्की वे के केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल है जिसका नाम सैजिटेरियस ए* है, जो पूरी आकाशगंगा को अपने गुरुत्वाकर्षण से थामे रखता है।
मिल्की वे में जीवन की संभावना और भविष्य की टक्कर
मिल्की वे में जीवन की संभावनाएँ बहुत हैं, क्योंकि इसमें लाखों ऐसे ग्रह हो सकते हैं जो ‘गोल्डीलॉक्स ज़ोन’ में हों। मुझे तो लगता है कि इतनी बड़ी जगह में कहीं न कहीं तो जीवन होना ही चाहिए!
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| आकार | सर्पिल (Spiral) |
| व्यास | लगभग 100,000 प्रकाश-वर्ष |
| तारों की संख्या | 100-400 अरब (अनुमानित) |
| केंद्रीय ब्लैक होल | सैजिटेरियस ए* (Sagittarius A*) |
| हमारी स्थिति | ओरियन आर्म में |
और हाँ, एक और चौंकाने वाली बात! हमारी मिल्की वे आकाशगंगा एंड्रोमेडा आकाशगंगा की ओर तेज़ी से बढ़ रही है, और करोड़ों साल बाद ये दोनों आपस में टकरा जाएँगी। मुझे ये सुनकर पहले तो डर लगा था, पर वैज्ञानिकों का कहना है कि तारों के टकराने की संभावना बहुत कम है, क्योंकि आकाशगंगाएँ ज़्यादातर खाली जगह होती हैं। ये टक्कर एक नया, विशालकाय आकाशगंगा बनाएगी। यह दिखाता है कि ब्रह्मांड हमेशा बदलता रहता है और कभी भी स्थिर नहीं रहता। यह प्रक्रिया प्रकृति के अविश्वसनीय बदलावों का एक और प्रमाण है।
글을 마치며
ब्रह्मांड की ये अनगिनत पहेलियाँ और उसके रहस्य वाकई हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं, है ना? हर नई खोज हमें यह एहसास दिलाती है कि हम इस विशाल ब्रह्मांड में कितने छोटे हैं और अभी कितना कुछ जानना बाकी है। मुझे तो लगता है कि ये यात्रा कभी खत्म नहीं होगी, और यही तो इसकी सबसे खूबसूरत बात है। एलियन जीवन की संभावना से लेकर ब्लैक होल के अद्भुत गुरुत्वाकर्षण तक, और डार्क मैटर व डार्क एनर्जी के रहस्यमय खेल तक, हर कदम पर एक नया आश्चर्य हमारा इंतज़ार कर रहा है। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि हमें अपनी जिज्ञासा को कभी मरने नहीं देना चाहिए। यह पोस्ट सिर्फ़ एक शुरुआत है, और उम्मीद है कि इसने आपके मन में ब्रह्मांड को जानने की एक नई ललक जगाई होगी।
알아두면 쓸모 있는 정보
1. रात में जब भी मौका मिले, शहर की रोशनी से दूर किसी शांत जगह पर जाकर आसमान को निहारिए। आपको तारे और शायद मिल्की वे की झलक भी देखने को मिलेगी। ये अनुभव मुझे हमेशा धरती से परे एक नई दुनिया का एहसास कराता है।
2. वैज्ञानिक जर्नल और लोकप्रिय विज्ञान वेबसाइटों पर ब्रह्मांड से जुड़ी ताज़ा ख़बरें ज़रूर पढ़िए। मुझे तो ये सब पढ़कर बहुत मज़ा आता है और मेरा ज्ञान भी बढ़ता है। नासा और ईएसए जैसी वेबसाइटें बेहतरीन जानकारी देती हैं।
3. अगर आपके घर में बच्चे हैं, तो उन्हें भी तारों और ग्रहों के बारे में बताइए। बच्चों में जिज्ञासा जगाना बहुत ज़रूरी है। मैंने देखा है कि वे कितनी जल्दी नई चीज़ें सीखते हैं और नए सवाल पूछते हैं।
4. छोटे टेलीस्कोप या दूरबीन का इस्तेमाल करके चाँद और कुछ चमकीले ग्रहों (जैसे बृहस्पति और शनि) को देखना एक शानदार अनुभव हो सकता है। मेरा पहला टेलीस्कोप मेरे लिए एक जादुई दरवाज़ा था।
5. डॉक्यूमेंट्री फ़िल्में देखना या पॉडकास्ट सुनना भी ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने का एक बेहतरीन तरीका है। “कॉस्मोस” जैसी सीरीज़ ने तो मेरी ज़िंदगी बदल दी थी। ज्ञान हासिल करने के बहुत सारे मजेदार तरीके हैं!
중요 사항 정리
मुझे लगता है कि ब्रह्मांड की इन विशालकाय पहेलियों पर बात करना हमेशा से ही मेरे लिए एक रोमांचक अनुभव रहा है। हमने देखा कि कैसे एलियन जीवन की संभावनाएँ सिर्फ़ कहानियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मंगल ग्रह पर पानी के निशान और हज़ारों एक्सोप्लैनेट्स की खोज इन संभावनाओं को और भी पुख़्ता करती हैं। यह सोचना कि हमारे जैसे ही जीवन कहीं और भी हो सकता है, वाकई अद्भुत है।
तारों का जन्म और उनका सुपरनोवा के रूप में अंत, और फिर उन्हीं से ब्लैक होल जैसी रहस्यमय चीज़ों का बनना, ये सब हमें ब्रह्मांड की निरंतर परिवर्तनशील प्रकृति के बारे में बताता है। मेरा मानना है कि इन घटनाओं को समझना हमें अपने अस्तित्व के बारे में भी बहुत कुछ सिखाता है। ये केवल विज्ञान नहीं, बल्कि एक दार्शनिक यात्रा भी है।
इसके साथ ही, डार्क मैटर और डार्क एनर्जी जैसी अदृश्य शक्तियों ने ब्रह्मांड के प्रति हमारी समझ को पूरी तरह से बदल दिया है। ये बताती हैं कि हमें जो दिखता है, वह पूरे ब्रह्मांड का बहुत छोटा सा हिस्सा है। आकाशगंगाओं को एक साथ रखने वाले डार्क मैटर से लेकर ब्रह्मांड के विस्तार को तेज़ करने वाली डार्क एनर्जी तक, ये अवधारणाएँ हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि अभी कितना कुछ ऐसा है जिसे हम नहीं जानते।
हमारी अपनी मिल्की वे आकाशगंगा भी अपने आप में एक ब्रह्मांड है, जिसके केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल है और जो करोड़ों सालों बाद एंड्रोमेडा से टकराने वाली है। यह सब दर्शाता है कि ब्रह्मांड एक जीवंत, गतिशील जगह है जहाँ हर पल कुछ न कुछ नया हो रहा है। मेरी व्यक्तिगत राय में, इन सभी जानकारियों से हमारा मन और भी खुलता है और हम अपने आसपास की दुनिया को एक नए नज़रिए से देख पाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖
प्र: क्या ब्रह्मांड में हमारे अलावा भी कहीं और जीवन मौजूद है?
उ: ये सवाल तो सदियों से इंसानों को बेचैन कर रहा है, है ना? मैंने भी कई बार सोचा है कि इतनी विशालकाय दुनिया में क्या हम अकेले हैं? वैज्ञानिक लगातार इस पर खोज कर रहे हैं। उन्होंने हमारे सौरमंडल के बाहर ऐसे हज़ारों ग्रहों को खोजा है जिन्हें ‘एक्सोप्लैनेट’ कहते हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं जहाँ पानी और उचित तापमान की संभावना है, यानी जीवन के लिए ज़रूरी चीज़ें मौजूद हो सकती हैं। जैसे, कुछ साल पहले खोजा गया प्रॉक्सिमा सेंटॉरी बी, जो अपने तारे से उतनी ही दूरी पर है जहाँ पानी तरल अवस्था में रह सकता है। सोचिए, वहाँ भी शायद कोई हमारी ही तरह आसमान की ओर देख कर यही सोच रहा हो!
कई बार मुझे लगता है कि हम शायद इतने अकेले नहीं हैं जितना हम सोचते हैं, बस अभी तक हमारी मुलाक़ात नहीं हुई है।
प्र: ब्रह्मांड इतना विशाल है, क्या हम कभी इसके छोर तक पहुँच पाएँगे या इसे पूरी तरह समझ पाएँगे?
उ: सच कहूँ तो ये सवाल मुझे हर बार हैरान कर देता है! ब्रह्मांड की विशालता की कल्पना करना ही अपने आप में एक अद्भुत अनुभव है। वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारा ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है, और शायद इसका कोई ‘छोर’ है ही नहीं। हम जिस हिस्से को देख पाते हैं, उसे ‘अवलोकनीय ब्रह्मांड’ (Observable Universe) कहते हैं, जिसकी चौड़ाई लगभग 93 अरब प्रकाश-वर्ष है। एक प्रकाश-वर्ष यानी प्रकाश की एक साल में तय की गई दूरी!
आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ये कितनी बड़ी संख्या है। मैं तो जब भी इस बारे में पढ़ता हूँ, तो अपने अस्तित्व को लेकर एक अलग ही भावना महसूस करता हूँ। इसे पूरी तरह समझना शायद हमारी ज़िंदगी में तो मुमकिन न हो, लेकिन हर नई खोज हमें इसके बारे में एक कदम और करीब ले जाती है, और यही रोमांच मुझे सबसे ज़्यादा पसंद आता है।
प्र: डार्क मैटर और डार्क एनर्जी क्या हैं और ये इतने रहस्यमय क्यों हैं?
उ: ये दो नाम सुनने में भले ही किसी विज्ञान-फाई फ़िल्म जैसे लगें, लेकिन ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक हैं, और मुझे ये कॉन्सेप्ट हमेशा से ही बहुत दिलचस्प लगे हैं!
असल में, वैज्ञानिक मानते हैं कि ब्रह्मांड का सिर्फ़ 5% हिस्सा ही हमें दिखाई देता है, यानी तारे, ग्रह, गैलेक्सियाँ – ये सब। बाकी का लगभग 27% हिस्सा ‘डार्क मैटर’ और 68% हिस्सा ‘डार्क एनर्जी’ से बना है। डार्क मैटर वो चीज़ है जो हमें दिखती नहीं, लेकिन इसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव हम देख सकते हैं; इसी की वजह से गैलेक्सियाँ एक साथ टिकी हुई हैं, वरना वो बिखर जातीं। वहीं, डार्क एनर्जी वो शक्ति है जो ब्रह्मांड के तेज़ी से फैलने के लिए ज़िम्मेदार है। ये दोनों ही चीज़ें अदृश्य हैं, और अभी तक हम इन्हें सीधे तौर पर पहचान नहीं पाए हैं। मुझे लगता है कि जब हम इन रहस्यों को पूरी तरह सुलझा लेंगे, तब ब्रह्मांड को देखने का हमारा नज़रिया ही बदल जाएगा। ये बिल्कुल ऐसा है जैसे किसी बड़ी पहेली के दो सबसे महत्वपूर्ण टुकड़े गुम हों, और वैज्ञानिक उन्हें ढूँढने में लगे हों।






